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हमारे बारे में
धानुक समाज भारत का एक प्राचीन एवं परिश्रमी जातीय समुदाय है, जिसके सदस्य भारत के अनेक राज्यों के साथ-साथ नेपाल और बांग्लादेश में भी निवास करते हैं। मध्य प्रदेश एवं बुंदेलखंड क्षेत्र में हमारा समाज बंसकार / बंशकार नाम से भी जाना जाता है — दोनों नाम एक ही समाज की पहचान हैं। "धानुक" शब्द की उत्पत्ति "धनुष" से मानी जाती है, अर्थात धनुर्धर — परंपरा के अनुसार हमारे पूर्वज राजाओं की सेनाओं में कुशल धनुर्धर योद्धा रहे। वहीं "बंसकार" नाम बांस की कला से जुड़ा है — बांस से टोकरी, डलिया, सूप, पंखा जैसी उपयोगी वस्तुएँ बनाने की हमारी पुश्तैनी शिल्प-परंपरा सदियों पुरानी है। आज हमारा समाज शिक्षा, व्यवसाय, शासकीय सेवा और सामाजिक क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। यह वेबसाइट समाज को संगठित करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है।

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